शेयर मार्केट कैसे सीखे हिंदी में | एक नए निवेशक के लिए गाइड

प्रस्तावना (Introduction)

शेयर मार्केट कैसे सीखे: शेयर मार्केट एक ऐसी जगह है झापड़ बोहोत सरे कंपनियों के शेयर्स को ख़रीदा और बेचा जाता है। शेयर मार्केट में आप पैसे कमा भी सकते है और अपने पैसे गवा भी सकते है। अगर आप किस कंपनीके शेयर्स खरीदते हो तोह आपको उस कंपनी में हिस्सा मिलता है। आप जितने शेयर्स खरीदते है उतने ज्यादा कंपनी में आप का हिस्सा % बढ़ जाता है।

इसका मतलब आपने निवेश की गयी कंपनी अगर भविष्य में अच्छा मुनाफा कमाएगी तोह आपको भी मुनाफा होगा। और अगर कंपनी को भविष्य में कोई घटा होता है तोह आपको भी घाटा होगा।

शेयर मार्केट कैसे सीखे

निवेश के लाभ और जोखिम (Benefits and Risks of Investing)

निवेश के लाभ (Benefits Of Investing)

  • निवेश करने से धन की वृद्धि हो सकती है। यदि आप अच्छे निवेश विकल्पों को चुनते हैं, तो आपके पैसे बढ़ सकता है।
  • निवेश करके आप अपने विभिन्न लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आर्थिक समर्थन प्रदान कर सकते हैं, जैसे कि बच्चों की शिक्षा, घर की खरीददारी, और स्वतंत्रता का आनंद लेना।
  • निवेश करके आप अपने आर्थिक लक्ष्यों की समृद्धि की ओर बढ़ सकते हैं, जिससे आपका आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकता है।

निवेश के जोखिम (Risks of Investing)

  • हमेशा मार्केट की स्थिति एक जैसी नहीं होती मार्किट में उतर चढाव होता है उस हिसाब से आपको लाभ या नुकसान हो सकता है।
  • बाजारी जोखिम, वित्तीय जोखिम, और विभिन्न आर्थिक कारणों के कारण निवेश में नुकसान हो सकता है।
  • कुछ कंपनी को विकसिति होने में समय लग सकता है और इस अवधि के दौरान निवेशकों को लाभ की कमी हो सकती है।
  • निवेश करते समय गलत निर्णय लेने का खतरा हो सकता है, जिससे नुकसान हो सकता है।

शेयर क्या होता है? What is a Share?

शेयर का मतलब होता है हिस्सा। किस चीज का हिस्सा इसे एक उदहारण से समज़ते है। मन लीजिये एक A नाम का आदमी है और उसने एक बिजनेस शुरू किया उसे अच्छी तरह से बढ़ाया और फिर कुछ सालो बाद उसका बिजनेस प्रॉफिटेबल हो गया और अब उसे उसका बिजनेस को बढ़ाना है।

बिजनेस को बढ़ने के लिए उसे 10 करोड़ रुपये लगेंगे, A के पास दो पर्याय है एक वोह किसी बैंक से लोन ले या फिर अपनी कंपनी स्टॉक मार्किट में लिस्ट करदे। दूसरे तरीके में वह अपने कंपनीके कुछ शेयर्स स्टॉक मार्किट में लाएंगे और पैसे लाएंगे A ने अपने हर पार्ट का डैम 1 रुपया रखा और 10 करोड़ पार्ट में से 1 करोड़ पार्ट स्टॉक मार्किट में 1 रूपया प्रति पार्ट बेच दिए। इन छोटे पार्ट को हम शेयर्स कहते है।

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शेयर मार्केट के प्रकार (Types of Stock Markets)

शेयर मार्केट के प्रकार

प्रायमरी मार्केट (Primary Market)

जब एक कंपनी अपना नया बिज़नेस चालू करती है और अगर वह कंपनी सबसे पहले अपने शेयर्स अगर भेचने के लिए लाती है तब वह प्रायमरी मार्केट में लाती है। जो लोग प्रायमरी मार्केट में इन्वेस्ट करते है उनके द्वारा कंपनी को फंड मिलता है और उसके बदलेमे कंपनी उनको अपने कंपनी के शेयर्स में हिस्सा देती है। हम प्रायमरी मार्केट में आप जो पैसा इन्वेस्ट करते है तोह वह पैसा सीधा कंपनी के पास जाता है। प्रायमरी मार्केट में इन्वेस्टर सिर्फ शेयर की खरेदी कर सकते है बेच नहीं सकते।

प्रायमरी मार्केट में कंपनी अलग अलग तरीके से पैसे जमा करती है
पब्लिक इशू (Public Issue)
प्रायवेट प्लेसमेंट (Private Placement)
राईट इशू (Right Issue)

सेकंडरी मार्केट (Secondary Market)

जब भी आप कोई शेयर प्रायमरी मार्केट में लेते है तोह उसे बेचने के लिए आपको सेकंडरी मार्केट में ही आना होगा। प्रायमरी मार्केट में शेयर सब लोग खरीद नहीं सकते लेकिन सेकंडरी मार्केट में सब लोग शेयर को खरीद और बेच सकती है।

स्टॉक मार्केट एक सेकंडरी मार्केट है जिसपर हम IPO में खरीदे गए शेयर्स को बेच सकते हो या खरीद सकते हो।
मतलब सेकंडरी मार्केट शेयर्स का बाजार है जहाँपर हम शेयर्स की खरेदी और बिक्री कर सकते है।

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शेयर खरीदने और बेचने की प्रक्रिया (Process of Buying and Selling Shares)

शेयर खरीदने और बेचने की प्रक्रिया के लिए सबसे पहले आपको एक D-mat अकाउंट बनाना होगा। D-mat अकाउंट खोलने के लिए मार्केट में अलग अलग अप्प्स आते है जैसे Zerodha, Angle One, Grow इत्यादि।

सबसे पहले आपके शेयर्स को वॉचलिस्ट में ऐड करना है। और फिर आपको जो शेयर बाय करना है उसपर क्लिक करना है।

फिर आपको उसकी क्वांटिटी को डालकर शेयर को बाय करना है।


निवेश की रणनीति (Investment Strategy)

निवेश की रणनीति

रिस्क प्रबंधन के उपाय (Risk Management Strategies)

स्टॉक मार्केट में अगर आपको रिस्क मैनेजमेंट करना नहीं आया तोह आप चाहे कितनी भी स्ट्रैटेजी सिख़लो आप नियमित रूप से मुनाफा नहीं ला सकते।
मार्क डगलस जो ट्रेडिंग इन थे जोन के ऑथर है उनके हिसाब से अगर आपको एक सफल ट्रेडर 80% पैसा मैनेज करता है और सिर्फ 20% स्ट्रैटेजी का उपयोग करता है।

अगर आप बिना रिस्क मैनेजमेंट के मार्केट में आते हो तोह आपका 1 लाख रूपया भी डूब सकता है। लईकिन अगर आपने रिस्क मैनेजमेंट को समज़कर ट्रेडिंग करि तोह आप 2 हजार से ज्यादा ला लॉस एक दिन में नहीं करेंगे। इसमें सबदे बड़ा काम स्टॉपलॉस करता है अगर आप एक नए ट्रेडर हो या पुराने आपको स्टॉपलॉस हमेशा लगाना है।

ऐसा भी हो सकता है की अगर किसी न्यूज़ से स्टॉक मार्केट निचे गिर गया और आपने स्टॉपलॉस लगाया हुआ है तोह आपका भरी नुकसान सोने से भच जायेगा और स्टॉपलॉस नहीं लगाया होगा तोह आपका भरी नुकसान हो जायेगा।


विभिन्न सेक्टर्स में निवेश की रणनीति (Investment Strategies in Various Sectors)

स्वास्थ्य सेक्टर (Health Sector)

  • स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते डिमांड को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य सेक्टर में निवेश करना एक अच्छा निर्णय हो सकता है।
  • फार्मा कंपनियों, अस्पतालों, और अन्य स्वास्थ्य सेवा कंपनियों में निवेश करने से बढ़ते चिकित्सा और स्वास्थ्य सम्बंधित विकासों का लाभ हो सकता है।

तकनीकी क्षेत्र (Technical Field)

  • तकनीकी क्षेत्र में निवेश करने से नवीनतम तकनीकी अपडेट्स और उनमें विनिवेश करने का अवसर हो सकता है।
  • साइबर सुरक्षा, वाणिज्यिक उपयोग के उत्पाद, और इंटरनेट सेवाओं के क्षेत्र में निवेश करने से तकनीकी उत्पादों और सेवाओं की मांग में वृद्धि हो सकती है।

ऊर्जा सेक्टर (Energy Sector)

  • विकासशील ऊर्जा सेक्टर में निवेश करना एक बढ़िया और लाभकारी रणनीति हो सकती है।
  • नवीनतम ऊर्जा तकनीकों और अन्य ऊर्जा स्रोतों में निवेश करने से ऊर्जा सम्बंधित उत्पादों और सेवाओं की मांग में वृद्धि हो सकती है।

संपत्ति सेक्टर (Real Estate Sector)

  • संपत्ति सेक्टर में निवेश करना भी एक अच्छा उपाय हो सकता है। भूमि, विकसित क्षेत्रों, और निर्माण योजनाओं के माध्यम से लाभ कमाया जा सकता है।
  • विकसित नगरों, व्यापारिक और आवासीय परियोजनाओं में निवेश करना स्थायी संपत्ति में वृद्धि का माध्यम हो सकता है।

टेक्निकल और फंडामेंटल एनालिसिस (Technical and Fundamental Analysis)

टेक्निकल और फंडामेंटल एनालिसिस

टेक्निकल एनालिसिस (Technical Analysis)

टेक्निकल एनालिसिस का मुख्य उद्देश्य आपको काम समय में ज्यादा मुनाफा कमाकर देना होता है। टेक्निकल एनालिसिस में शेयर के प्राइस और वॉल्यूम को देखकर एनालिसिस करके ट्रेड लिया जाता है। प्राइस और वॉल्यूम मुख्य रूप से कैंडलस्टिक पैटर्न एनालिसिस, चार्ट पैटर्न एनालिसिस, टेक्निकल इंडिकेटर एनालिसि, ट्रेंड एनालिसिस, सपोर्ट और रजिस्टन्स, ब्रेकआउट और ब्रेकडाउन का उपयोग करके नए लेवल्स का पता करना होता है। टेक्निकल एनालिसिस आपको लंबे समय का मार्केट एनालिसिस नहीं देता।

फंडामेंटल एनालिसिस (Fundamental Analysis)

फंडामेंटल एनालिसिस का मुख्य उद्देश्य आपको लंबे समय में अच्छा मुनाफा देना होता है। फंडामेंटल एनालिसिस चार्ट पैटर्न का उपयोग नहीं किया जाता बल्कि इसमें कंपनियों का फायनेंसियल एनालिसिस किया जाता है। फायनेंसियल एनालिसिस में आने वाले सालो में कंपनी कितना मुनाफा कमा सकती है इसका अनुमान लगाया जाता है।


लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म निवेश (Long-Term and Short-Term Investment Plans)

लॉन्ग टर्म (Long-Term Investment)

जो लोग लॉन्ग टर्म में निवेश करते है वह लोग १ साल से ज्यादा समय के लिए पैसे इन्वेस्ट करते है। और इसी कारन से लॉन्ग टर्म निवेशकोंको शॉर्ट टर्म निवेशकों से काम रिस्क होता है। मार्केट में हर दिन उतर चढाव होता है लेकिन इसका असर लॉन्ग टर्म निवेशकों पर नहीं होता। अगर कभी बाजार में गिरावट भी हो जाये तो वास्तविक थिति थोड़े दिनों में प्राप्त कर सकते है। लॉन्ग टर्म निवेश में कंपनी निश्चित रूपसे आपको अच्छा रिटर्न देती है।

शॉर्ट टर्म (Short-Term Investment)

शार्ट टर्म में इन्वेस्टर १ साल से काम के लिए इन्वेस्टमेंट करते है। शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट में अलग अलग टैक्स लगते है। बाजार में हमेशा चढ़ाव उतर होता रहता है इसीलिए शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट में ज्यादा रिस्क होता है।

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